Arts & Literature

राज़दार छुपा कर राज़दार ज़ख़्म सीने में ख़ामोश रहे लब मेरे परेशां हूँ आँखों ने सब कह ही दिया मेरी तबाही की लकीरें थी मेरे ही हाथों में बुझ गए मोहब्बत के चिराग मेरे हाथों से हैरान हूँ अब परिंदों ने भी छोड़ ही दिया शिकवा कर भी नहीं सकता तक़दीर से दोस्त ...